लोहार्गल धाम
भारतवर्श के राजस्थान प्रान्त के झुंझुनू जिला मुख्यालय से 70 कि.मी. दुर स्थित लोहार्गल पवित्र स्थान अपनी सौन्दर्यता से अभिभूत एक प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। लोहार्गल घाम, तहसील उदयपुरवाटी जिला झुन्झुनू, उदयपुरवाटी सीकर हाईवे पर गोलियाना से 4-5 किलोमीटर अन्दर पहाडों के बीच शांत और रमणीक स्थान पर स्थित हैं। यहा की छटा देखने पर पृथ्वी के स्वर्ग का सा नजारा अनुभव होता हैं। यहॉ प्रतिवर्ष लाखो श्रृदालू इस रमणीय पर्यटन स्थल पर घुमने आते हैं। इस स्थान पर प्राचीन सूर्य मन्दिर स्थित हैं। यहा आने वाले श्रृद्धालू सर्वप्रथम यहॉ स्थित कुुण्ड मे स्नान करते हैं। इस कुण्ड पर प्रकृति की कृपा दृष्ट्रि से लगातार पहाड़ो से पानी आता रहता हैं। यह पानी कुण्ड मे, कुण्ड के पास स्थित गौमुख द्वार से लगातार कुण्ड मे बहता रहता है। यहा आने वाले श्रृद्धालू कुण्ड मे स्नान करने के उपरान्त सूर्य मन्दिर के दर्षन व बरखण्डी की परिक्रमा प्रारम्भ करते हैं। इस पवित्र स्थान पर प्रतिवर्ष भाद्रपद की अमावस्या को विषाल मेला भरता हैं। जिसे देखने के लिए, दुर दराज के प्रदेषो से श्रृद्धालू आते हैं। इस स्थान पर लोगो का ठहरने के लिए विभिन्न जाति विषेष के लोगो द्वारा बनाए गये मन्दिर व धर्मषालाऐ स्थित हैं।
लोहार्गल धाम के चारों तरफ आम के घने वृक्ष लगे हैं, जो वहा के स्थानिय लोगो की आय का साधन हैं। सबसे प्रमुख बात यह है कि लोहार्गल मे बिकने वाला आचार पुरे देष मे प्रसिद्ध हैं। लोहार्गल आने वाले यात्री यहा का प्रसिद्ध विभिन्न प्रकार के आचार भारी मात्रा मे ले जाते हैं।
प्राकृतिक की गोद मे स्थित लोहार्गल धाम मे श्रावण के पूरे महिने भर कावड ले जाने वाले षिव भक्तो की भीड़ लगी होती हैं। लोहार्गल धाम के सभी रास्तो “ बोल बम, ताडक बम” के नारो से गुंजते रहते हैं। षिव भक्त लोहार्गल कुण्ड से निकलने वाले पवित्र जल को झारी (लोटा) मे भर कर, सावधानी पूर्वक कावड में सजा कर, अपने इष्ट देव शंकर जी को चढाने के लिए गृह स्थान पर लाते हैं।
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