स्वामी श्री खेतादास जी महाराज
आपका
जन्म ग्राम मलसीसर ] जिला झुंझुनू राजस्थान मे हुआ था। आपका मन सांसारिक
कार्यो मे नही लगा और रुचि सतसंग मे बढने लगी। भजन किर्तन तथा साधु-सन्तो
के प्रति आपका आकर्षण बढा। आपके गुरुजी का नाम श्री लक्ष्मण दास जी था। जो
जाति से राजपूत थे। आप बहुत अच्छे समाज सुधारक थे। आपने अनेक लोगो को
दुव्र्यसनो से मुक्ति
दिलाई। आपके उपदेश तथा सद्कार्यो से लोग बहुत प्रभावित होते थे। आपके शिष्य
पुरे देश मे बसे हुए हैं। आपने अपने जीवन काल मे अपनी साधना शक्ति और
उत्तम चरित्र के कारण बहुत से चमत्कारी परचे दिये हैं। जो कि अविश्मरणीय
है। आपने गॉव-गॉव जाकर अपने समाज के लोगो को सामाजिक कुरीतियो एवमं
बुराइयों को त्यागने व सामाजिक चेतना जागृत करने पर बल दिया। व समाज के
लोगों को दारु-मांस जैसे दुव्र्यसनो से दुर रहने का मंत्र दिया।
आपके संपर्क सुत्रो व शिष्यो से पता चला कि आप रात्रि को शरीर से आत्मा को
निकाल कर विभिन्न रुप धारण कर रात्रि विचरण को चले जाते थे। इस बात कि
जानकारी सिर्फ आपके कुछ खास शिष्यों को ही थी।बस यही कारण आपकी मृत्यु का
बना।
आपके शिष्यों ने बताया कि एक बार गुरुजी के पास किसी कारणवश मिलने हेतु उदयपुरवाटी ]झुंझुनू के रैगर समाज के लोग आये। आपने उनकी समस्या का समाधान भी किया। तथा वे शाम को आपसे विदा लेकर] अपने गॉव को निकल गये। उनकी विदाई के उपरान्त आपने अपने शरीर से आत्मविहीन शरीर को मंदिर मे छोड़ कर] रात्रि विचरण को चले जाते थे। लेकिन उधर आपसे मिलने आये उन व्यक्तियों को यातायात का कोई साधन नही मिलने के कारण वे पुनः मन्दिर में लौट आये।
आपके शिष्यों ने बताया कि एक बार गुरुजी के पास किसी कारणवश मिलने हेतु उदयपुरवाटी ]झुंझुनू के रैगर समाज के लोग आये। आपने उनकी समस्या का समाधान भी किया। तथा वे शाम को आपसे विदा लेकर] अपने गॉव को निकल गये। उनकी विदाई के उपरान्त आपने अपने शरीर से आत्मविहीन शरीर को मंदिर मे छोड़ कर] रात्रि विचरण को चले जाते थे। लेकिन उधर आपसे मिलने आये उन व्यक्तियों को यातायात का कोई साधन नही मिलने के कारण वे पुनः मन्दिर में लौट आये।
मन्दिर में लौटने पर जब उन्होने आपका आत्मा विहिन शरीर देखा तो उन्होनें
आप को मृत समझा। और फिर आस पडौस के गॉवो से रैगर समाज के लोगो को इकट्ठा
करके उन्होने अज्ञानता वश आपके शरीर का दाह-संस्कार कर दिया।जब आपका दाह-संस्कार कि तैयारी हो रही थी। तब आपने ग्राम बगड़ झुंझुनू निवासी श्री ईश्वर राम जी फुलवारिया के सपने मे आये व उन्हे तुरत लोहार्गल पहुच कर देह को न जलाने को कहा। लेकिन उस समय यातायात व संचार के साधनो के आभाव मे उनको लोहार्गल पहुचने मे देरी हो गई। लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। तब उन्होने व आपके ब्रहमलीन की खबर सुनकर पधारे आपके अन्य शिष्यो मे स्वामी जी द्वारा देह छोड़कर भ्रमण करने की बात कही। इस प्रकार धोखे से आपकी मृत्यु हुई। लेकिन ऐसी महान आत्मा कभी मर नही सकती। वे आज भी ऐसा लगता है कि गुरुजी आर्शिवाद स्वरुप मे हमारे सम्मुख ही विराजमान हैं।
कुछ भक्तगण ये भी बताते हैं कि स्वामी जी ने विजय दशमी के दिन समाधी ली थी। इसलिए स्वामी जी के शिष्य व भक्तगण प्रत्येक माह की शुक्ल पक्ष दशमी को सत्संग का आयोजन व प्रशाद वितरण का पुण्य कार्य करते हैं।
एक बार कि धटना हैं कि आप बाबाजी बनने के बाद जब अपने पैतृक गॉव लोटे रहे थे। तब आपके गॉव मे बने कॅुए मे पानी पीने पर आपको स्वर्ण जाति के लोगों द्वारा प्रताड़ित किया गया व मार कर गॉव से बहार निकाला गया।
इस घटना के बाद उस गॉव मे जल स्त्रोतो का पानी खारा हो गया व कॅुओ का जल सुख भी गया। जब गॉव के लोगो को अपनी गलती का अहसास हुआ। तो वे आपको मनाने के लिए लोहार्गल धाम आये व अपने किये कि माफी मांगी। और आप ने उन लोगो को माफ भी कर दिया। और गॉव के जल स्त्रोतो व कॅुओ मे पुनः पानी भर आया।
आपने जीवन बहुत से चमत्कार किये हैं। जिनका यदि यहा वर्णन करे तो पुरा पोथा तैयार हो जायेगा। जैसे- आपका सत्संग मे शेर बनना] जरीकन के दुध की दारु बनना] सत्संग मे बैठे बैठे गायब हो जाना। आपके आर्शिवाद स्वरुप आपके बहुत से भक्तो को संतान सुख की प्राप्ति होना तथा उनके कृष्टो का निवारण होना।
एक बार कि धटना हैं कि आप बाबाजी बनने के बाद जब अपने पैतृक गॉव लोटे रहे थे। तब आपके गॉव मे बने कॅुए मे पानी पीने पर आपको स्वर्ण जाति के लोगों द्वारा प्रताड़ित किया गया व मार कर गॉव से बहार निकाला गया।
इस घटना के बाद उस गॉव मे जल स्त्रोतो का पानी खारा हो गया व कॅुओ का जल सुख भी गया। जब गॉव के लोगो को अपनी गलती का अहसास हुआ। तो वे आपको मनाने के लिए लोहार्गल धाम आये व अपने किये कि माफी मांगी। और आप ने उन लोगो को माफ भी कर दिया। और गॉव के जल स्त्रोतो व कॅुओ मे पुनः पानी भर आया।
आपने जीवन बहुत से चमत्कार किये हैं। जिनका यदि यहा वर्णन करे तो पुरा पोथा तैयार हो जायेगा। जैसे- आपका सत्संग मे शेर बनना] जरीकन के दुध की दारु बनना] सत्संग मे बैठे बैठे गायब हो जाना। आपके आर्शिवाद स्वरुप आपके बहुत से भक्तो को संतान सुख की प्राप्ति होना तथा उनके कृष्टो का निवारण होना।
!! जय स्वामी श्री खेतादास जी महाराज की !!

जय स्वामी श्री खेतादास जी महाराज की
जवाब देंहटाएंये हमारे घर मैं 50 या 60 साल से। है
जवाब देंहटाएंये महाराज के सेवक मेरे दादा के दादा थे इनकी फ़ोटो हमारे घर मे बहुत पहले से आज खुसी हुए हमें इसे देख कर
जवाब देंहटाएंमहारज की जय हो
जवाब देंहटाएंभाई इनकी तस्वीर तो हमारे घर कई सालों से है और मेरे पिताजी के दादजी इनके शिष्य है
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